अमेरिकी वर्चस्व की शुरुआत 1991 में हुई जब सोवियत संघ का विघटन हो गया और पूरा विश्व एक ध्रुवीय हो गया।
वर्चस्व (Hegemony) शब्द का अर्थ है- सभी क्षेत्रों में (सैन्य,आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक) अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक मात्र शक्ति का केंद्र होना।
हेजेमनी शब्द का प्रयोग प्राचीन यूनान के नगर राज्यों में एथेंस के शक्तिशाली होने के लिए प्रयोग किया जाता था। वर्तमान में यह शब्द अमेरिका की शक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है।
नीचे तीन दृष्टांत दिए गए हैं जो किसी न किसी प्रकार से पूरे विश्व में अमेरिकी वर्चस्व को दर्शाते हैं।
आयशा बगदाद की एक पढ़ाकू छात्रा है, जो डॉक्टर बनना चाहती है। लेकिन अमेरिकी हवाई हमले से उसने अपने दोनों पैर खो दिए। इसके बावजूद भी वह डॉक्टर बनना चाहती है, लेकिन ऐसा तब संभव है, जब अमेरिकी सेना इराक को खाली करें और फिर से जन जीवन पटरी पर उतरे।
जाबू दक्षिण अफ्रीका डरबन में रहने वाला एक प्रतिभाशाली कलाकार है वह चित्रकारी बहुत अच्छा करता है और उसकी चित्रकार बनने व स्टूडियों खोलने की इच्छा है। लेकिन उसके पिता उसे MBA की पढ़ाई करके फेमिली बिजनेस में हाथ बंटाने का दबाव बना रहे हैं।
आंद्रेई ऑस्ट्रेलिया पर्थ में रहता है जो रूसी मूल का है।चर्च जाते समय भी आंद्रेई नीली जीन्स पहन लेता है जिससे उसका उसकी मां से बहस होने लगती है।जिस पर उसके पिता उसकी माँ को समझाते हैं कि जवानी के दिनों में हम लोग भी तो नीली जीन्स पहना करते थे, इसमें स्वतंत्रता का एहसास होता है।
सैन्य ताकत के रूप में वर्चस्व
अमेरिका वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है।
उसके पास विभिन्न प्रकार के अत्याधुनिक हथियार हैं।
उसकी रक्षा प्रणाली बहुत ही उन्नत है।
अपने वार्षिक बजट का एक बड़ा हिस्सा रक्षा क्षेत्र में खर्च करता है।
लगातार वह रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान करता रहता है।
अमेरिका का रक्षा बजट विश्व के सबसे ज्यादा ताकतवर 12 देशों के कुल रक्षा बजट से भी ज्यादा है।
ढांचागत ताकत या आर्थिक शक्ति के रूप में
अमेरिका विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।पूरे विश्व में 21% हिस्सेदारी।
वैश्विक नियमों को बनाने और उसे लागू करने की क्षमता रखता है।
दूसरे देशों के मामलों में भी हस्तक्षेप कर और वहां की व्यवस्था सुधारने में सक्षम है
अपनी नौसैनिक ताकत के बल पर समुद्री मार्ग की आवाजाही को नियमित करता है।
जीपीएस, इंटरनेट, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट व अमेरिकी उपग्रहों पर पूरे विश्व की निर्भरता उसकी ढांचागत ताकत को व्यक्त करता है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक व विश्व व्यापार संगठन में अमेरिका का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
MBA का पाठ्यक्रम अमेरिका ने ही सबसे पहले शुरू किया। यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया में वाहर्टन स्कूल नाम से पहला बिजनेस स्कूल 1881 में अमेरिका में ही खुला।अमेरिका ने पूरी दुनिया को यह बताने की कोशिश किया कि व्यापार के लिए भी पाठ्यक्रम होना चाहिए।
सांस्कृतिक क्षेत्र में वर्चस्व
अमेरिकी संस्कृति का पूरे विश्व में प्रभाव परिलक्षित हो रहा है।
सभी अमेरिका जाने व वहां बसने के लिए लालायित रहते हैं।
वहां का खानपान पहनावा पूरी दुनिया ने कॉपी कर लिया है।
सोवियत संघ के विघटन में अमेरिकी सांस्कृतिक वर्चस्व की विशेष भूमिका रही।
नई विश्व व्यवस्था
प्रथम खाड़ी युद्ध-1991 (ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म)
अगस्त 1990 में इराक ने कुवैत पर आक्रमण करके उस पर कब्जा कर लिया। UNO व अन्य देशों द्वारा इराक को समझाने की कोशिश की गई कि कुवैत को वह मुक्त करें, लेकिन इराक नहीं माना। तब अमेरिकी दबाव में संयुक्त राष्ट्र संघ (U.N) ने बल प्रयोग की अनुमति दे दी। यह एक नाटकीय फैसला कहलाया क्योंकि U.N.O शीत युद्ध के दौरान ज्यादातर मामलों में चुप्पी साधे रहता था लेकिन इस बार इतना बड़ा फैसला इतनी शीघ्रता से ले लिया। इसे ही जॉर्ज H.W बुश (सीनियर बुश) ने नई विश्व व्यवस्था की संज्ञा दी।
प्रथम खाड़ी युद्ध में 34 देशों के (6,60,000) सैनिक शामिल थे। इसमें 75% सैनिक अमेरिका के थे।
इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का ऐलान था कि यह 100 जंगों की 1 जंग साबित होगी लेकिन इस भारी-भरकम सेना ने इराक को जल्द ही पराजित करके कुवैत को इराकी चंगुल से मुक्त करा दिया। इसी युद्ध को प्रथम खाड़ी युद्ध कहते हैं।
प्रथम खाड़ी युद्ध या संयुक्त राष्ट्र संघ के इस सैन्य अभियान को ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म भी कहा जाता है।
इस युद्ध ने अमेरिका के उत्कृष्ट सामरिक और प्रौद्योगिकी वर्चस्व को उजागर किया। इसमें अमेरिका द्वारा स्मार्ट बमों का प्रयोग किया गया और इसे कंप्यूटर युद्ध का नाम दिया गया। समूचे विश्व में पहली बार दूरदर्शन(TV) पर युद्ध के भीषण दृश्य दिखाए गए।इस घटना को पूरी दुनिया में लाइव इसलिए दिखाया गया जिससे कि अमेरिका की ताकत का सबको पता लग सके।
युद्ध के पश्चात एक प्रकाशित रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि इस युद्ध में अमेरिका ने जर्मनी, जापान, सऊदी अरब जैसे देशों से धन उगाही किये और लाभ भी कमाये हैं।
प्रथम खाड़ी युद्ध तो फरवरी 1991 में ही समाप्त हो गया लेकिन इराक पर लगाये गए प्रतिबंध सद्दाम हुसैन के शासनकाल तक अर्थात 2003 तक चलते रहे।
विल क्लिंटन का दौर
'ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच'
1992 के राष्ट्रपति चुनाव में जार्ज H W बुश हार गए उनके स्थान पर डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार विल क्लिंटन चुनाव जीते।
क्लिंटन साहब दो कार्यकाल अर्थात 2000 तक राष्ट्रपति रहे। इस दौरान ज्यादातर उन्होंने अपने घरेलू नीतियों पर ध्यान दिया। सैन्य-शक्ति और सुरक्षा जैसी कठोर राजनीति की जगह लोकतंत्र के बढ़ावे,जलवायु परिवर्तन तथा विश्व व्यापार जैसे नरम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।
लेकिन इस दौरान भी अमेरिकी सेना अपनी ताकत के प्रदर्शन के लिए तैयार दिखी।
जब 1999 में यूगोस्लाविया ने अपने प्रांत कोसोवो (2008 में स्वतंत्र) में चल रहे अल्बानियाई (कुल जनसंख्या का 92%) आंदोलन को कुचलने के लिए सैन्य कार्यवाही की तो इसके जवाब में अमेरिकी नेतृत्व में नाटो ने यूगोस्लाविया में दो महीने तक बमबारी की और कोसोवो पर नाटो का कब्जा हो गया।
क्लिंटन के दौर की दूसरी बड़ी सैन्य कार्यवाही नैरोबी(केन्या) और दारे-सलाम(तंजानिया) के अमेरिकी दूतावासों पर बमबारी (अलकायदा द्वारा) के जवाब में 1998 में हुई।अलकायदा के खिलाफ इस अमेरिकी सैन्य कार्यवाही को 'ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच' नाम दिया गया।इस ऑपरेशन के तहत अमेरिका ने सूडान और अफगानिस्तान के अलकायदा के ठिकानों पर कई बार क्रूज मिसाइल से हमले किये।
अमेरिका ने अपनी इस कार्यवाही के लिए UNO से सहमति नही ली थी। इस कार्यवाही में उसने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की परवाह नहीं की, इसमें आम नागरिकों को भी निशाना बनाया गया जिनका आतंकवाद से कोई लेना देना नही था।
9/11 की घटना व आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध
ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम
11सितंबर 2001 के दिन अरब देशों के19 अपहरण कर्ताओं ने उड़ान भरने के चंद मिनटों बाद 4 अमरीकी व्यावसायिक विमानों पर कब्जा कर लिया।
अपहरणकर्ताओं ने इन विमानों को अमेरिका की चार महत्वपूर्ण इमारतों(वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी और दक्षिणी टावर न्यूयार्क, अमेरिकी रक्षा विभाग का मुख्यालय पेंटागन वर्जिनिया- अर्लिगटन व अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की मुख्य इमारत)को ध्वस्त करने के लिए हाइजैक किया था।
तीन विमान अपने लक्ष्य को साधने में सफल हुए जबकि अमेरिकी संसद को ध्वस्त करने की कोशिश असफल रही और विमान पेंसिल्वेनिया के एक खेत में गिर कर नष्ट हो गया।
इसी घटना को 9/11(11 सितंबर) नाइन एलेवन की घटना कहा जाता है।इस घटना में लगभग 3हजार लोग मारे गए थे।अमेरिकी जमीन पर अब तक का ये सबसे बड़ा हमला था।
इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश (जूनियर) थे। इन्होंने 9/11 के जवाब में तुरंत कदम उठाए और जवाबी कार्यवाही किये।
अमेरिका ने आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध शुरू कर दिया और इसी के तहत अफगानिस्तान में तालिबान शासन को समाप्त करने के लिए ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम चलाया।चूंकि अमेरिका को शक था कि 9/11 का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन (अलकायदा प्रमुख) है, जो अफगानिस्तान में छुपा था।
अमेरिकी कार्यवाही से अफगानिस्तान से तालिबान शासन का तो शीघ्र अंत हो गया लेकिन अलकायदा प्रमुख अफगानिस्तान से बच निकला। जिसे 2011 में पाकिस्तान के एतबाबाद में समाप्त किया गया, लेकिन अलकायदा के अवशेष अभी भी सक्रिय हैं।
द्वितीय खाड़ी युद्ध 2003 - इराक पर आक्रमण
ऑपरेशन इराकी फ्रीडम
अमेरिकी नेतृत्व में 40 से ज्यादा देशों की संयुक्त सेना ने इराक को सद्दाम हुसैन के शासन से मुक्त करने के लिए मार्च 2003 में इराक पर आक्रमण कर दिया।इसे ऑपरेशन इराकी फ्रीडम कहा गया।
इस कार्यवाही के लिए UNO ने सहमति नहीं दी थी।
अमेरिका ने इराक पर आक्रमण का कारण यह बताया- इराक को सामूहिक विनाश के हथियारों को बनाने और उसके भंडारण करने से रोकना है।जबकि इराक में सामूहिक विनाश के हथियारों के कोई प्रमाण नही मिले।
जबकि इस आक्रमण का असली मकसद इराक के तेल-भंडार पर नियंत्रण और वहां अमेरिका की सनपसंद सरकार को स्थापित करना था।
अमेरिकी शक्ति के रास्ते में अवरोध
साम्राज्यों का पतन उनकी अंदरूनी कमजोरियों के कारण होता है।ठीक इसी तरह अमेरिकी वर्चस्व के मार्ग में भी कुछ बाधाएं अवश्य ही हैं। ये बाधाएं निम्न हैं-
अमेरिका की संस्थागत बुनावट- यहां शासन के तीन अंगों के बीच शक्ति का बंटवारा है और यही बुनावट कार्यपालिका द्वारा सैन्य शक्ति के बेलगाम इस्तेमाल पर अंकुश लगाने का काम करती है।
अमेरिकी उन्मुक्त समाज- अमेरिका में जनसंचार के साधन समय-समय पर जनमत को भले ही एक खास दिशा में मोड़ने की कोशिश करें, लेकिन यहां की राजनीतिक संस्कृति हमेशा ही यहां की सरकार को सही दिया में विदेश व रक्षा नीति को आगे ले जाने हेतु दबाव बनाती रहती है। वियतनाम युद्ध के समय यहाँ की जनता ने ऐसा ही दबाव बनाने की कोशिश किया था, जिसके कारण अमेरिका को खाली हाथ वियतनाम से लौटाना पड़ा था।
नाटो- चूंकि अमेरिका का बहुत बड़ा हित इस संगठन को कायम रखने से जुड़ा है इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि नाटो के सदस्य देश अमेरिका के वर्चस्व को कुछ हद तक चुनौती दे सकते हैं या उस पर अंकुश लगा सकते हैं।
अमेरिकी वर्चस्व से कैसे निपटें?
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में ऐसी चीजें गिनी चुनी हैं जो किसी देश की सैन्य शक्ति पर लगाम लगा सकें। विश्व सरकार जैसी कोई संस्था नही है। UNO जैसे कुछ अंतर्राष्ट्रीय संगठन हैं, जो कुछ सीमा तक राष्ट्रों के व्यवहार पर अंकुश लगाते हैं लेकिन इतने अंकुश से बात नही बनने वाली। क्योंकि कोई भी देश अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को अपनी सुरक्षा की गारंटी नही मानता और न हैं ही। तो क्या यह मान लिया जाए कि अमेरिकी वर्चस्व पर कोई अंकुश नही है?
भारत, रूस और चीन संयुक्त रूप से या यूरोपीय संघ अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती दे सकते हैं लेकिन इनके आपसी विवाद अमेरिका के विरुद्ध कोई बड़ा गठबंधन बनाने से रोकता है। जिसका फायदा अमेरिका को मिल रहा है। लेकिन इन सब के बावजूद भी विशेषज्ञों ने अमेरिकी वर्चस्व से निपटने के निम्न तरीके बताए हैं-
बैंडवैगन नीति अर्थात 'जैसी बहे बयार,पीठ तैसी कीजै'।
वर्चस्व वाले देश से यथा संभव दूरी बना के रखना।
राज्येतर संस्थाएं जैसे स्वयं सेवी संगठन, सामाजिक आंदोलन, जनमत, मीडिया का एक बड़ा तबका, बुद्धिजीवी, लेखक कलाकार आदि संस्थाएं एक विश्वव्यापी नेटवर्क बना सकती हैं, जिसमें अमेरिकी लोग भी शामिल हो सकते हैं, ये सभी मिलकर अमेरिका की नीतियों की आलोचना कर सकते हैं
आज हम एक विश्व-ग्राम में रहते हैं और इस विश्व-ग्राम का चौधरी अमेरिका है। हम सभी उसके पड़ोसी हैं। यदि इस चौधरी का बर्ताव असहनीय है तो भी हमारे पास इस गांव को छोड़कर किसी और गांव में जाने का विकल्प नहीं है। इसलिए हमें मिलकर विरोध करना ही होगा और उसके वर्चस्व पर नियंत्रण लगाना ही होगा।
भारत-अमेरिकी संबंध
शीत युद्ध काल में भारत अमेरिका गुट के विरुद्ध खड़ा था।इन सालों में भारत की करीबी दोस्ती सोवियत संघ के साथ थी।
सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत ने पाया कि लगातार कटुतापूर्ण होते अंतर्राष्ट्रीय माहौल में वह मित्रविहीन हो गया है।
इसी अवधि में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण करके तथा उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का भी फैसला किया।
अपनी LPG नीति और हाल के वर्षों में आर्थिक वृद्धि-दर के कारण भारत अमेरिका सहित सभी बड़े व ताकतवर देशों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
हाल ही के वर्षों में भारत-अमेरिका संबंधों के बीच दो नई बातें उभरी हैं-
प्रौद्योगिकी
अमेरिका में बसे अनिवासी भारतीय
दरअसल ये दोनों बातें आपस में जुड़ी हैं।इस संदर्भ में निम्नलिखित तथ्य विचारणीय हैं।
भारत का 65% सॉफ्टवेयर के क्षेत्र का निर्यात अमेरिका को जाता है।
बोइंग में 35% तकनीकी कर्मचारी भारतीय हैं।
सिलिकॉन वैली(उत्तरी कैलिफोर्निया के शहर सान फ्रांसिस्को) में 3 लाख भारतीय काम करते हैं ।
उच्च प्रद्योगिकी के क्षेत्र में 15% कंपनियों की शुरुआत अमेरिका में बसे भारतीयों ने की है।
चूंकि आज अमेरिका के वर्चस्व का दौर है, अतः बाकी देशों के साथ भारत को भी विचार करना होगा कि अमेरिका के साथ अपने संबंधों को कैसे आगे बढ़ाना है। इस संबंध में विशेषज्ञों में मतभेद है।भारत मे निम्नलिखित तीन रणनीतियों पर बहस चल रही है-
भारत को अमेरिका से दूरी बनाए रखना चाहिए और अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
भारत को अमेरिका के वर्चस्व का फायदा उठाना चाहिए।अमेरिका के विरोध की रणनीति हानिकारक साबित हो सकती है।
भारत विकासशील देशों को एकजुट करके गठबंधन बनाये।
भारत और अमेरिका के संबंध इतने जटिल हैं कि किसी एक रणनीति पर नही चला जा सकता। समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों की अभिवृद्धि हेतु जो भी जरूरी कदम हों, उसी के अनुसार चलना ज्यादा श्रेयस्कर होगा।
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एक अंकीय प्रश्न
1. अमेरिकी वर्चस्व की शुरूआत कब हुई ?
उत्तर :- 1991 में, सोवियत संघ के विघटन के बाद।
2. पेंटागन क्या है?
उत्तर :- अमेरिका का रक्षा मुख्यालय।
3. IMF का शब्द विस्तार लिखो।
उत्तर :- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष।
4. अमेरिकी वर्चस्व से बचने का कोई एक तरीका बताइये।
उत्तर :- अपने को छिपा लेने की नीति।
5. वाक्य सही करके लिखो
एम.बी.ए. की डिग्री अमेरिका के सैन्य वर्चस्व को दर्शाती है।
उत्तर :- एम.बी.ए. की डिग्री अमेरिका के आर्थिक वर्चस्व को दर्शाती है।
6. 9/11 की घटना के लिए किस आतंकवादी गुट को जिम्मेवार माना गया।
उत्तर :- अलकायदा
7. प्रथम खाड़ी युद्ध कब हुआ ?
उत्तर :- 1991 में
8. ऑपरेशन "डेजर्ट स्टॉर्म" नामक सैन्य अभियान का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर :- अमेरिकी जनरल नार्मन श्वार्जकॉव।
9. आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए विश्वव्यापी युद्ध को किस नाम से जाना गया।
उत्तर :- ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम।
10. अमेरिकी नेतृत्व में कॉअलिशन ऑफ वीलिंग्स (आकांक्षियों का महाजोट) किस देश के विरूद्ध बना?
उत्तर :- इराक के विरुद्ध 2003 में।
11. कौन सा युद्ध वीडियो गेम वार या कंप्यूटर युद्ध के नाम से जाना गया ?
उत्तर :- प्रथम खाड़ी युद्ध (1991)
12. बैंड बैगन नीति क्या है?
उत्तर :- वर्चस्व वाले देश का विरोध करने के बजाय उसके तंत्र के अवसरों का लाभ उठाया।
13. नई विश्व व्यवस्था क्या है?
उत्तर :- सोवियत संघ के विघटन के बाद अमेरिका का बढ़ता प्रभाव।
14. ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच किसके विरूद्ध चलाया गया ?
उत्तर :- अलकायदा के विरूद्ध
15. 'स्मार्ट बम' से क्या अभिप्राय है?
उत्तर :- प्रथम खाड़ी युद्ध में अमरीका द्वारा प्रयोग में लाये गये बमों को विज्ञापनी अंदाज में स्मार्ट बम कहा गया।
16. ब्रेटनवुड प्रणाली को संक्षेप में बतायें।
उत्तर :- वैश्विक व्यापार के नियम अमरीकी हित के अनुसार तय करना।
17. रिक्त स्थान की पूर्ति करें।
a)............देशों की मिली-जुली और......... सैनिकों की भारी भरकम फौज ने इराक के विरूद्ध मोर्चा खोला।
b) क्यूबा के निकट अमरीकी नौ सेना का एक ठिकाना.................में है।
उत्तर :- अ) 34,660000
ब) ग्वांतानामो बे
18. SLOCs का शब्द विस्तार लिखें।
उत्तर :- Sea Lane of Communications (समुद्री व्यापार-मार्ग)
19. वाक्य को सही कर पुनः लिखें।
a) प्रथम खाड़ी युद्ध को ऑपरेशन एन्डयूरिंग फ्रीडम के नाम से जाना जाता है।
b) विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत है।
उत्तर :-
a) प्रथम खाड़ी युद्ध को ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म के नाम से जाना जाता है।
b) विश्व की अर्थव्यवस्था में अमरीका की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत है।
20. सही विकल्प का चयन कीजिए।
द्वितीय खाड़ी युद्ध 2003 में इराक के लगभग कितने नागरिक मारे गये।
(1) 3000 (2) 5000 (3) 20000 (4) 50000
उत्तर :- 4)50000
21. ऑपरेशन इराकी फ्रीडम में देश शामिल हुये।
(1) 35 से ज्यादा
(2) 34 से ज्यादा
(3) 50 से ज्यादा
(4) 40 से ज्यादा
उत्तर :- 4) 40 से ज्यादा
दो अंकीय प्रश्न
1. पहला बिजनेस स्कूल कब और कहाँ खुला?
उत्तर :- यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया में वाहर्टन स्कूल के नाम से 1881 में। एम. बी.ए. के शुरूआती पाठ्यक्रम 1900 से आरम्भ हुए।
2. बर्चस्व (हेगेमनी) से आप क्या समझते हो?
उत्तर :- दूसरे के व्यवहार को प्रभावित या नियंत्रित करने की क्षमता, जिससे कि वह प्रत्येक बात मान ले, वर्चस्व कहलाता है।
3. राष्ट्रपति विल क्लिंटन ने अपने कार्यकाल के दौरान किन मुद्दों पर अधिक जोर दिया?
उत्तर :- लोकतंत्र को बढ़ावा, जलवायु परिवर्तन तथा विश्व व्यापार जैसे नरम मुद्दों पर जोर दिया।
4. प्रथम खाड़ी युद्ध किन दो पक्षों के बीच लड़ा गया?
उत्तर :- इराक और अमेरिकी नेतृत्व में 34 देशों की संयुक्त सेना के बीच।
5. 9/11 की घटना से अमेरिकी सोच में क्या बदलाव आया ?
उत्तर :- आतंकवाद को विश्वव्यापी घटना अर्थात् अंतर्राष्ट्रीय समस्या माना।
6. भारत और अमेरिका के बीच मित्रता दर्शाने वाले किन्ही दो तथ्यों को उजागर कीजिए।
उत्तर :-
भारत और अमेरिका के मध्य असैन्य परमाणु करार।
प्रौद्योगिकी और अमेरिका में बसे अनिवासी भारतीय।
7. ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के तहत इराक पर किए गए आक्रमण का वास्तविक मकसद क्या था ?
उत्तर :-
इराक के पेट्रोलियम-भंडार पर नियंत्रण।
इराक में अमेरिका-परस्त सरकार का गठन ।
8. ऑपरेशन एन्डयूरिंग फ्रीडम के अन्तर्गत क्या-क्या कदम उठाए गए?
उत्तर :-
अलकायदा और तालिबान को निशाना बनाया गया।
संदेहास्पद लोगों को गिरफ्तार कर 'ग्वातानामो बे" में रखा गया।
9. सही जोड़ी बनाइये
1. ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म.
2. ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच
3. ऑपरेशन एन्डयूरिंग फ्रीडम
4. ऑपरेशन इराकी फ्रीडम
(क) बिल क्लिंटन
(ख) 9/11 की घटना के बाद
(ग) जॉर्ज बुश सीनियर
(घ) जार्ज डब्ल्यू बुश जूनियर
उत्तर :-
1) ग
2) क
3) ख
4) घ
तीन/चार अंकीय प्रश्न :-
1. अमेरिकी बर्चस्व का सैन्य तथा सांस्कृतिक संदर्भ में उल्लेख कीजिए।
उत्तर :- हो चुका है।
2. 11 सितम्बर 2001 को अमेरिका पर आतंकवादी हमला क्यों हुआ ? इस पर अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या थी?
उत्तर :-
पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए तथा ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच की प्रतिक्रिया स्वरूप।
अमेरिका ने आतंकवाद के विरूद्ध विश्वव्यापी युद्ध प्रारंभ कर दिया। अफगानिस्तान से अलकायदा और तालिबान को समाप्त करने के लिए ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम चलाया।
3. अमेरीका के वर्चस्व से निबटने के विभिन्न उपायों पर चर्चा कीजिए ?(IMP)
उत्तर :-
बैंडवेगन नीति।
अपने को छुपा लेने की नीति।
राज्येतर संस्थाओं जैसे मीडिया, स्वयसेवी संगठन, बुद्धिजीवियों द्वारा सामूहिक प्रतिकार।
बड़े व शक्तिशाली देश जैसे चीन, रूस और भारत संयुक्त रूप से अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती दे सकते हैं।
4. विश्व की अर्थव्यवस्था में अमेरिका का क्या स्थान है ? इसका उदाहरण सहित वर्णन करो।
उत्तर :- -
विश्व की अर्थव्यवस्था में अमेरिकी भागीदारी 21 प्रतिशत है।
हर क्षेत्र में अमेरिका की कोई न कोई कम्पनी अग्रणी तीन कम्पनियों में से है।
प्रमुख आर्थिक अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे IME, विश्व बैंक तथा विश्व व्यापार संगठन पर अमेरिका का दवदवा।
वर्ल्ड वाइड वेब या इंटरनेट पर अमेरिकी प्रभुत्व।
अमेरिका द्वारा प्रारंभ किया गया पाठ्यक्रम MBA की लोकप्रियता पूरे विश्व में।
डॉलर को हार्ड कैरेन्सी के तौर पर मान्यता।
पाँच अंकीय प्रश्न
1. दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें एवं संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
"कुछ लोग मानते हैं कि अमरीकी वर्चस्व का प्रतिकार कोई देश अथवा देशों का समूह नहीं कर पाएगा क्योंकि आज सभी देश अमेरिकी ताकत के आगे बेबस हैं। ये लोग मानते हैं कि राज्येत्तर संस्थाएँ अमरीकी वर्चस्व के प्रतिकार के लिए आगे आएंगी। अमरीकी वर्चस्व को आर्थिक और सांस्कृतिक धरातल पर चुनौती मिलेगी।"
अमरीकी वर्चस्व का प्रतिकार कौन कर सकता है?
"राज्येत्तर संस्थाओं" से क्या तात्पर्य है ?
अमरीकी वर्चस्व का प्रतिकार किस प्रकार किया जा सकता है ?
उत्तर :-
राज्येत्तर संस्थाएं।
स्वयंसेवी संगठन, मीडिया व बुद्धिजीवी आदि।
ये संस्थाएं आपस में मिलकर विश्वव्यापी नेटवर्क बना सकती हैं। जिसमें अमेरिकी नागरिक भी शामिल हो सकते हैं।
2. निम्नलिखित अवतरण को ध्यान से पढ़िए तथा संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ?
1992 में बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्ट्रपति बने। क्लिंटन ने विदेश नीति की जगह घरेलू नीति को अपने चुनाव प्रचार में मुद्दा बनाया था। क्लिंटन 1996 में दुबारा चुनाव जीते और इस तरह वह आठ सालों तक राष्ट्रपति पद पर रहे। क्लिंटन के दौर में ऐसा जान पड़ता था कि अमेरिका ने अपने को घरेलू मामलों तक सीमित कर लिया है। विदेश नीति के मामले में क्लिंटन सरकार ने सैन्य शक्ति और सुरक्षा जैसी कठोर राजनीति की जगह लोकतंत्र के बढ़ावे, जलवायु परिवर्तन तथा विश्व व्यापार जैसे नरम मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित किया।
1992 में राष्ट्रपति बने क्लिंटन साहब किस पार्टी के उम्मीदवार थे तथा उन्होंने किस उम्मीदवार को हराया ?
क्लिंटन के चुनाव प्रचार के मुख्य मुद्दे क्या थे ?
क्लिंटन ने किन मुद्दों को अपने कार्यकाल के दौरान उठाया?
उत्तर :-
डेमोक्रेटिक पार्टी, जार्ज बुश सीनियर।
विदेश नीति की जगह घरेलू नीति को अपने चुनाव कैम्पेन में मुख्य मुद्दा बनाया।
लोकतंत्र के बढ़ावे, जलवायु परिवर्तन तथा विश्व व्यापार जैसे नरम मुद्दो पर अपना ध्यान केन्द्रित किया।
3. अमेरिकी वर्चस्व की राह में तीन अवरोध कौन-कौन से हैं ? स्पष्ट कीजिए। (IMP)
उत्तर :-
अमेरिका की संस्थागत बुनावट।
अमेरिकी उन्मुक्त समाज।
नाटो।
4. अमरीकी वर्चस्व को उसकी सैन्य शक्ति, ढाचागत वर्चस्व तथा सांस्कृतिक वर्चस्व के रूप में व्याख्या करो ? (IMP)
उत्तर :- हो चुका है।
5. अमरीका के साथ भारत के संबंध किस प्रकार के होने चाहिए? इसके बारे में भारत के अंदर तीन विभिन्न दृष्टिकोणों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर :-
भारत को अमेरिका से दूरी बनाए रखनी चाहिए और अपने राष्ट्रीय हितों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
भारत को अमेरिकी वर्चस्व का यथा संभव अपने हित में लाभ उठाना चाहिए। अमेरिका का विरोध करना व्यर्थ होगा और अंततः भारत को क्षति पहुँचेगी।
भारत को विकासशील देशों को साथ लेकर गठबंधन बनाना चाहिए और अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देना चाहिए।
6. अमेरिका की उन्नत प्रौद्योगिकी, भारतीयों की मेहनत का फल है। इस कथन के पक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत कीजिए?
उत्तर :-
सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भारत के कुल निर्यात का 65 प्रतिशत अमेरिका को जाता है।
बोईंग के 35 प्रतिशत तकनीकी कर्मचारी भारतीय मूल के हैं।
3 लाख भारतीय 'सिलिकन वैली में कार्यरत हैं।
उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र की 15 प्रतिशत कम्पनियों की शुरूआत अमेरिका में बसे भारतीयों ने की है।
7. क्या भारत और अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु समझौता, भारत-अमेरिकी संबंधों में मील का पत्थर है? अपने विचार तर्क सहित प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :- हां
भारत को सामरिक बढ़त।
ऊर्जा आवश्यकताओं की पूति।
परमाणु आपूर्ति समूह NSG द्वारा यूरेनियम की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
विश्व राजनीति में भारत का कद बढ़ना एवं छवि में सुधार।
भारत अमेरिकी संबंधों में प्रगाढ़ता
अन्य विकसित देशों जैसे फ्रांस के साथ भी इसी प्रकार का समझौता करना।
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