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12th Political Science Complete Notes

  📘 Part A: Contemporary World Politics (समकालीन विश्व राजनीति) The Cold War Era (शीत युद्ध का दौर) The End of Bipolarity (द्विध्रुवीयता का अंत) US Hegemony in World Politics ( विश्व राजनीति में अमेरिकी वर्चस्व ) Alternative Centres of Power ( शक्ति के वैकल्पिक केंद्र ) Contemporary South Asia ( समकालीन दक्षिण एशिया ) International Organizations ( अंतर्राष्ट्रीय संगठन ) Security in the Contemporary World ( समकालीन विश्व में सुरक्षा ) Environment and Natural Resources ( पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन ) Globalisation ( वैश्वीकरण ) 📘 Part B: Politics in India Since Independence (स्वतंत्रता के बाद भारत में राजनीति) Challenges of Nation-Building (राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ) Era of One-Party Dominance (एक-दलीय प्रभुत्व का युग) Politics of Planned Development (नियोजित विकास की राजनीति) India’s External Relations (भारत के विदेश संबंध) Challenges to and Restoration of the Congress System ( कांग्रेस प्रणाली की चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना ) The Crisis of Democratic...

मेरे संपादकीय लेख

ग्रीनलैंड की खरीद: एक राजनीतिक खेल या रणनीतिक आवश्यकता? 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया। यह विचार केवल एक व्यावसायिक निर्णय नहीं था, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक दृष्टिकोण से भी देखा गया। ग्रीनलैंड, जो दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, उत्तरी ध्रुव के पास स्थित होने के कारण आर्कटिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति रखता है। इसके प्राकृतिक संसाधन, जैसे खनिज और तेल, और वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण उत्पन्न हो रहे नए शिपिंग मार्ग, इसे किसी भी देश के लिए आकर्षक बनाते हैं। लेकिन, क्या ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक खेल था या यह वास्तव में एक रणनीतिक आवश्यकता थी? राजनीतिक दृष्टिकोण: ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है, और डेनमार्क ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस प्रस्ताव को अमेरिकी हितों के बजाय, एक वैश्विक स्तर पर मंथन के रूप में देखा जा रहा था। डोनाल्ड ट्रंप का यह विचार राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला था, खासकर तब जब अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में...

गणित शिक्षण में सुधार की जरूरत

पहले यह माना जाता था कि हम विज्ञान के क्षेत्र में भले ही पीछे हो लेकिन गणित के क्षेत्र में बहुत आगे हैं। नोबेल पुरस्कारों के वितरण के समय हमारे देश में इस संदर्भ में अवश्य चर्चा होती है लेकिन क्या आपको यह पता है कि गणित के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार एबेल अब तक केवल एक भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास एस आर वर्धन (2007 में) को ही प्राप्त है। अर्थात हम गणित के क्षेत्र में भी पिछड़ते चले जा रहे हैं। एक बार आईआईआईटी इलाहाबाद में सेमिनार चल रहा था जिसमें सभी वक्ता नोबेल पुरस्कार विनर थे। वहां दर्शक दीर्घा से एक सवाल पूछा गया कि क्या कारण है कि भारत के लोग गणित और विज्ञान के क्षेत्र में बहुत आगे होते हुए भी नोबेल जैसे अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों को पाने में पीछे रह जाते हैं? प्रश्नकर्ता का इशारा चयन प्रक्रिया में भेदभाव की तरफ था लेकिन वैज्ञानिकों ने जो जवाब दिया वह सभी भारतीयों की बोलती बंद करने वाला था। उत्तर में यह बात निकलकर आयी कि भारतीय लोग गणित और विज्ञान को अलग अलग करके पढ़ते हैं जिसके कारण वे गणित के अनुप्रयोग को सही से समझ नहीं पाते हैं। भारत में प्योर मैथमेटिक्स पर विशेष...

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